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36 का सप्ताह 04

उभरता हुआ प्रश्न (The Emerging Question)

ICF दक्षता आधार: Evokes Awareness — MCC गहराई पर मार्कर 7.1-7.10 · Listens Actively — MCC गहराई पर मार्कर 5.4

90 मिनट

यह सप्ताह

Level 1 पर, आपने शक्तिशाली प्रश्न पूछना सीखा। Level 2 पर, आपने ऐसे प्रश्न पूछना सीखा जो संज्ञान (cognition) के नीचे तक पहुँचते हैं। Level 3 पर, आप पूछना बंद कर देते हैं। एक मास्टर कोच प्रश्न उत्पन्न (generate) नहीं करता है। मास्टर कोच उन्हें प्राप्त करता है। MCC गहराई पर आने वाला प्रश्न कोच के दिमाग द्वारा निर्मित नहीं किया गया था। यह कोच और क्लाइंट के बीच के मौन से उभरा था। कोच इसे बोलता है। लेकिन यह पहले से ही वहां था।

इस सप्ताह की चिंतन-साधना

The Emerging Question

प्रतिदिन पंद्रह मिनट। बैठें। अपने जीवन के बारे में एक ऐसा प्रश्न मन में लाएँ जिसे आप साथ लेकर चल रहे हैं — एक वास्तविक प्रश्न, कोई सामान्य प्रश्न नहीं। बिना उत्तर देने की कोशिश किए उस प्रश्न के साथ बैठें। अंततः एक उप-प्रश्न (sub-question) उठेगा — प्रश्न के नीचे का प्रश्न। उसके साथ बैठें। अंततः एक और उप-प्रश्न उभर सकता है। तब तक जारी रखें जब तक आप उस तक न पहुँच जाएँ जो आधारभूत प्रश्न (bedrock question) जैसा लगता है — वह प्रश्न जिसे आप और गहरा नहीं पूछ सकते। शेष समय उसी के साथ बैठें। यह अभ्यास आपके अपने जीवन में उभरे हुए प्रश्नों को पहचानने की क्षमता को प्रशिक्षित करता है ताकि आप उन्हें अपने क्लाइंट के जीवन में पहचान सकें।

अध्ययन उद्देश्य

  • निर्मित प्रश्न (कोच के विश्लेषणात्मक दिमाग से) और उभरे हुए प्रश्न (बीच के मौन से) के बीच अंतर करना।
  • उस ठहराव (pause) का अभ्यास करना जो प्रश्न को उभरने देता है — इसे उस सीमा से परे बढ़ाना जो सहज महसूस होती है।
  • उभरे हुए प्रश्न के दैहिक हस्ताक्षर (somatic signature) को पहचानना (इसे महसूस किया जाता है, सोचा नहीं जाता)।
  • प्रतीक्षा करने का अनुशासन बनाना, तब भी जब विश्लेषणात्मक दिमाग के पास एक चतुर प्रश्न तैयार हो।
  • अपनी आवाज़ में स्पष्ट करना शुरू करना कि एक MCC-स्तर का प्रश्न पूछना और प्राप्त करना कैसा लगता है।

सत्र की संरचना

  • Hour 1 — श्रेणीबद्ध बदलाव। मुख्य प्रशिक्षक निर्मित प्रश्न (जो ठीक है और जो कोचिंग का अधिकांश हिस्सा है) और उभरे हुए प्रश्न (जो दुर्लभ है और जो महारत है) के बीच अंतर सिखाते हैं। काम करते हुए MCC कोचों के वास्तविक रिकॉर्ड किए गए सत्रों के उदाहरण।
  • Hour 2 — ठहराव का अनुशासन। एक 30 मिनट का अभ्यास जिसमें छात्र जोड़ों में बैठते हैं। एक बोलता है; दूसरा नब्बे सेकंड तक सुनता है और फिर उभरे हुए प्रश्न की प्रतीक्षा करनी चाहिए, चाहे कितना भी समय लगे। कभी नब्बे सेकंड। कभी तीन मिनट। अनुशासन यह है कि निर्मित प्रश्न के साथ जल्दबाजी न की जाए। स्थान बदलें। अनुभव साझा करें।
  • Hour 3 — दैहिक हस्ताक्षर। इस पर शिक्षण कि शरीर में उभरा हुआ प्रश्न कैसा महसूस होता है — एक 'सही होने' (rightness) का भाव होता है जो बौद्धिक नहीं बल्कि महसूस की गई संवेदना की सही स्थिति है। मन अक्सर थोड़ी देर बाद आता है और या तो उस संवेदना की पुष्टि कर सकता है या उसे दरकिनार कर सकता है। MCC महसूस की गई संवेदना (felt-sense) पर भरोसा करता है।
  • Hour 4 — लाइव कोचिंग अभ्यास। प्रत्येक छात्र समूह के सामने 25 मिनट का कोचिंग सत्र आयोजित करता है। समूह उभरे हुए प्रश्नों बनाम निर्मित प्रश्नों को सुनता है। प्रत्येक सत्र के बाद, विशेष रूप से प्रश्नों पर संरचित प्रतिक्रिया — क्या वह उभरा हुआ था? क्या वह निर्मित था? उसका दैहिक हस्ताक्षर क्या था?

पठन सामग्री

  • The Transpersonal Leader — उभरे हुए प्रश्न और बीच के मौन पर अध्याय
  • चिंतनशील जांच (contemplative inquiry) पर चयनित पठन — Big Mind प्रक्रिया, कोआन (koan) परंपरा
  • Theory U प्रिसेंसिंग और उस प्रश्न पर चयनित पठन जो क्षेत्र (field) से उभरता है
  • मास्टर शिक्षक के प्रश्न की गुणवत्ता पर चयनित पठन (Krishnamurti, Adyashanti)

सक्रिय परंपराएँ

Coaching (anchor) — the emerged question at MCC depth · Contemplative — silence as the source of speech · NLP — language patterns at master integration · Transpersonal — the bestowal at the level of the question itself

पड़ाव

तीन सहकर्मी-कोचिंग (peer-coaching) सत्रों की रिकॉर्डिंग की समीक्षा और निर्मित बनाम उभरे हुए प्रश्नों के लिए एनोटेशन। प्रश्न-उभरने के पैटर्न का मानचित्रण। दैनिक Emerging Question अभ्यास को एकीकृत किया गया। एक उभरे हुए प्रश्न के दैहिक हस्ताक्षर को व्यक्तिगत भाषा में व्यक्त करना।

चिंतन-प्रश्न

इस सप्ताह के सत्रों में, निर्मित (constructed) बनाम उभरे हुए (emerged) प्रश्नों का अनुपात क्या है? मैंने कब मौन से असहज होने के कारण एक निर्मित प्रश्न पूछने में जल्दबाजी की? मेरे शरीर में एक उभरे हुए प्रश्न की महसूस की गई संवेदना (felt-sense) कैसी लगती है? अभी मेरे अपने जीवन का आधारभूत प्रश्न क्या है?