मानपुरा
- 1
सुनना
हर ढाणी में जाना और पूछना कि गाँव ख़ुद खुशी में कैसे बढ़ना चाहता है।
- 2
न्योता
महिला समूहों, बुज़ुर्गों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और पंचायत को सफ़र गढ़ने का न्योता देना।
- 3
नक्शा बनाना
मिलकर भलाई का नक्शा बनाना: भलाई की 8 परतें और दर्द व आघात के 7 क्षेत्र।
- 4
अभ्यास
करघा, परिवार और महिला घेरों में हैप्पीनेस रिचुअल का अभ्यास।
- 5
मिलकर बुनना
घेरों को गाँव की अपनी संस्थाओं, गीतों और त्योहारों में बुनना।
- 6
खिलना
गाँव अपनी राह ख़ुद चलता है और अगले गाँव के साथ चलता है।
खुशहाल गाँव
कहानी
मानपुरा वह जगह है जहाँ खुशहाल गाँव की शुरुआत होती है। यहाँ बुनकर महिलाएँ अपने करघों पर मिलकर पहले से ही हैप्पीनेस रिचुअल (खुशी की रीत) करती आई हैं: साँस, एक कहानी कार्ड, बातें बाँटने का घेरा, एक निर्देशित ध्यान और रचनात्मक अभिव्यक्ति, दिन-ब-दिन। करघे के इन घेरों से अब यह काम घेरा-दर-घेरा फैल रहा है: परिवारों तक, पड़ोसियों तक और पूरे गाँव तक। मानपुरा अभी “सुनना” चरण में है: हर ढाणी में जाना, महिला समूहों, बुज़ुर्गों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और पंचायत से मिलना, और पूछना कि गाँव ख़ुद खुशी में कैसे बढ़ना चाहता है। गाँव के लिए कुछ भी तय नहीं किया जाता; गाँव ख़ुद तय करता है।
आगे क्या होगा
न्योता. महिला समूहों, बुज़ुर्गों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और पंचायत को सफ़र गढ़ने का न्योता देना।
अपने स्तर पर साथ दें
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World Happiness Foundation का एक कार्यक्रम। प्रमुख: प्रो. लुइस मिगेल गायार्डो।